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Ambedkar Nagar News: एकतरफा मुकाबले में जीत फिर चेयरमैन बने चंद्रप्रकाश

Sun, 14 May 2023 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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कबरपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद पर जीत के बाद निर्दल प्रत्याशी चंद्रप्रकाश वर्मा का स्वागत क
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- अकबरपुर नगर पालिका में रचा तीसरी बार जीत का इतिहास
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- भाजपा से अध्यक्ष रहीं सरिता गुप्ता को हराया
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। प्रतिष्ठा की सबब बनीं अकबरपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष की सीट पर निर्दल चंद्रप्रकाश वर्मा ने धमाकेदार जीत दर्ज की। उन्होंने यहां से अब तक अध्यक्ष रहीं भाजपा प्रत्याशी सरिता गुप्ता को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। दूसरे स्थान पर सपा की बागी निर्दल प्रत्याशी नाजरीन बेगम रहीं। बसपा प्रत्याशी को चौथा स्थान मिला।
जिला मुख्यालय की नगर परिषद सीट के चुनाव में सभी दलों ने अपनी प्रतिष्ठा लगा दी थी। भाजपा के लिए यह सीट सबसे ज्यादा प्राथमिकता वाली थी। क्योंकि इसी एक मात्र सीट पर उसके प्रत्याशी सरिता गुप्ता की जीत पिछले चुनाव में हुई थी। सरिता को फिर से टिकट मिला। उन्हें टिकट न देने के लिए पार्टी में काफी अंतरविरोध था। इसके बावजूद उन्हें टिकट दिया गया। भाजपा ने उनकी जीत के लिए यहां एड़ी चोटी से जोर भी लगा दिया। इसके चलते माना जा रहा था कि वे मुख्य मुकाबले में रहेंगी और उन्हीं से सबका चुनावी संघर्ष होगा।
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हालांकि परिणाम इसके विपरीत रहा। हुआ यह कि यहां निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रप्रकाश वर्मा ने अपनी सरल छवि व कार्य कुशलता के बल पर सभी वर्गों का समर्थन हासिल किया। वे शुरु से ही लीड बनाए रखने में सफल रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सभी प्रमुख दलों के सक्रिय कार्यकर्ता तक उनके लिए निजी तौर पर काम करते देखे गए। इससे उन्होंने मुकाबले को एकतरफा बना दिया। यहां कुछ प्रत्याशियों ने काफी खर्चीला चुनाव कर दिया। इसके मुकाबले चंद्रप्रकाश अकेले ही गांव गांव घर घर दौड़ते रहे।
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मतदाताओं ने उनका भरपूर साथ देकर फिर से चेयरमैन बना दिया। वह इससे पहले भी दो बार वर्ष 2007 व 2012 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चेयरमैन रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर अकबरपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन सफल नहीं हो पाए थे। इसके बाद वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा में शामिल होकर विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली। अब निर्दलीय के तौर पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से उनके साथ सहानुभूति की एक लहर भी काम कर रही थी।
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