अंबेडकरनगर। कभी बसपा के अभेद गढ़ रहे जिले में हो रहे निकाय चुनाव में पार्टी के सामने इतिहास दोहराने की चुनौती है। बीते निकाय चुनाव में अध्यक्ष के पांच में से दो पदों पर बसपा का कब्जा था। इस बीच दो नए निकाय बढ़ जाने के बाद सात पद के लिए हो रहे चुनाव में बसपा के सामने सफलता का दबाव बढ़ गया है। हालांकि पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत लगा रखी है लेकिन इसका नतीजा कितना व कैसा आता है यह अभी बहुत स्पष्ट नहीं है।
29 सितंबर 1995 को तत्कालीन फैजाबाद जनपद को विभक्त कर अंबेडकरनगर जनपद का सृजन करने वाली तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व में बसपा ने यहां इतिहास रचा है। जनपद गठन के पहले ही विधानसभा व लोकसभा सीट पर जीत का परचम लहराने के चलते ही इस क्षेत्र को नए जिले का तोहफा दिया गया। इसके बाद पार्टी ने निकाय चुनाव से लेकर पंचायत तथा विधानसभा व लोकसभा चुनाव में एक के बाद एक शानदार सफलता हासिल की। स्वयं बसपा प्रमुख मायावती ने यहां से लोकसभा व विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की।
हालांकि समय के साथ जिले में बसपा की पकड़ कमजोर होती गई। लोकसभा सीट पर भले ही बसपा का कब्जा है लेकिन जिपं. अध्यक्ष सीट पर भाजपा जबकि सभी पांच विधानसभा सीटों पर सपा काबिज है। बीते निकाय चुनाव में पांच सीटों के सापेक्ष बसपा ने जलालपुर नगर पालिका परिषद व इल्तिफातगंज नगर पंचायत अध्यक्ष के पद पर ही जीत हासिल की थी। इस बार जहांगीरगंज व राजेसुल्तानपुर नाम से दो नई नगर पंचायत बन गई है। बसपा ने सभी सात सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
ऐसे में पार्टी के सामने यह चुनौती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों को हासिल कर अपने गढ़ को फिर से सहेजा जा सके। इसके लिए बसपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत लगा रखी है। संदेश यह भी देने की चुनौती है कि बसपा छोड़कर कई वरिष्ठ नेताओं के सपा मेें शामिल हो जाने के बावजूद यहां पार्टी की स्थिति कमजोर नहीं पड़ी है।