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लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर नायक बने बरकत

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अंबेडकरनगर। लगभग डेढ़ सौ लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर अकबरपुर नगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बरकत अली नागरिकों के बीच नए नायक के तौर पर उभरे हैं। यूं तो उनके द्वारा एक मदरसे का भी संचालन किया जाता है, लेकिन वे लावारिस शव के अंतिम संस्कार के अलावा रक्तदान व जरूरतमंदों को राशन आदि की मदद करने से लेकर अन्य तरह की सेवा में जुटे दिखाई पड़ते हैं। उनके इस कार्य को लेकर अक्सर तमाम जरूरतमंद उन्हें खोजते हुए उनके आवास या फिर कैंप कार्यालय तक पहुंच जाते हैं।
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अकबरपुर नगर के मुरादाबाद रेलवे स्टेशन क्षेत्र निवासी बरकत अली का नाम कुछ वर्षों में समाजसेवा के क्षेत्र में तेजी से उभरा है। उनके द्वारा ऐसे शव के अंतिम संस्कार का वीणा वर्ष 2014 से उठाया जा रहा है जो लावारिस होते हैं। इनमें मार्ग हादसे के अलावा ट्रेन व बस से यात्रा करने वाले यात्रियों, मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों तथा कई बार हत्या का शिकार व्यक्ति का शव शामिल होता है।
कोरोना संक्रमण के दौरान जब परिवार के सदस्य तक अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं हो रहे थे, तब ऐसे में बरकत अली व उनकी टीम के सदस्यों ने आगे बढ़कर ऐसे शवों का अंतिम संस्कार किया। कोरोना पीड़ित मरीजों की मौत के बाद अंतिम संस्कार करने के लिए बाकायदा पीपीई किट पहनकर बरकत व अन्य सदस्य जिम्मेदारी उठाते रहे। बीते आठ वर्ष से लगातार वे इस मुहिम में जुटे हैं।
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लावारिस शव मिलने पर नियत समय के बाद जीआरपी के अलावा तमाम थानों की पुलिस टीम बरकत से संपर्क करती है। वे इसके बाद पूरे विधिविधान से संबंधित शव का अंतिम संस्कार करते हैं। बरकत के अनुसार वे अब तक 150 से अधिक लावारिस शव का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। इनमें लगभग 20 महिलाओं के भी शव शामिल हैं।
रक्तदान के अलावा करते अन्य मदद
बरकत अली दूसरों की जान बचाने के लिए तीन बार खुद रक्तदान कर चुके हैं। वे ऐसे व्यक्तियों को रक्त देते हैं, जिनके परिवार का कोई सदस्य नहीं होता। उनके द्वारा रक्तदान शिविर में बढ़-चढ़कर अपनी टीम के सदस्यों को शामिल कराया जाता है। ऐसा इसलिए जिससे रक्तदान कर जरूरतमंदों की जान बचायी जा सके। विश्व प्रसिद्घ किछौछा दरगाह शरीफ आने वाले जायरीन के लिए राशन व कंबल का वितरण करने वाले बरकत ने कोरोना काल के दौरान दर्जनों परिवारों को राशन की मदद भी पहुंचायी। बाहर से आ रहे यात्रियों के लिए लंच पैकेट की व्यवस्था भी बड़े पैमाने पर करायी गई। प्रत्येक नवरात्र व रमजान में उनकी टीम की तरफ से फल बांटे जाते हैं। रेलवे स्टेशन के निकट का निवासी होने के कारण उनके द्वारा अक्सर स्टेशन पहुंचने वाले असहाय यात्रियों की मदद सुनिश्चित की जाती है।
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