आलापुर(अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के नरवा पीतांबरपुर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रवाचक पंडित ओम नारायण त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को धार्मिक मनोरथ की अनुभूति कराने के साथ ही जीवन जीने की उच्चतम कला भी समझाई। उन्होंने कहा कि भागवत कथा धर्म ग्रंथ होने से पहले एक जीवन मार्गदर्शिका है। यह बताती है कि कैसा बोलें, कैसा सोचें, कैसे जिएं और लोगों के साथ कैसा व्यवहार रखें। बहुत से लोग कथा सुनने आते हैं, लेकिन कम लोग कथा को आत्मसात करते हैं। अगर भागवत सुनकर मन बदला और व्यवहार नहीं बदला, तो कथा सिर्फ मनोरंजन बनकर रह जाएगी। सच्चा भक्त वह है, जिसकी वाणी में मधुरता, व्यवहार में विनम्रता और जीवन में सत्यता हो। नंदबाबा के घर जन्म लेकर भगवान ने स्पष्ट किया कि दिव्यता जाति-संस्कार से नहीं, बल्कि कर्म और नीति से सिद्ध होती है। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध और सबसे बड़ा मित्र धैर्य है। जो क्षमा कर लेता है वह जीतता है और जो बदला लेता है वह हार जाता है। प्रवाचक ने ईर्ष्या, अपमान, तुलना, दिखावा और अत्यधिक इच्छाओं को जीवन में तनाव और अशांति की जड़ बताया। इस दौरान मनीष, विनोद, मनोज, अवधेश, मुकेश व अन्य उपस्थित रहे।