अंबेडकरनगर। प्रशासन की योजना पर मुहर लगी तो जिले को सारस सिटी का दर्जा मिल सकता है। झीलों व तालाबों में सारस पक्षी की बड़ी तादाद में मौजूदगी के चलते प्रशासन ने उन्हें संरक्षित करने तथा पानी की पर्याप्त उपलब्धता का निर्णय लिया है। जून में कर्मचारियों को लगाकर सभी तालाबों व झीलों में मौजूद सारसों की गणना कराई जाएगी। उनके लिए और उपयुक्त माहौल कैसे बनाया जा सकता है इस दिशा में भी काम होगा।
जिला प्रशासन ने पिछले कुछ दिनों से तालाबों व झीलों के सौंदर्यीकरण की मुहिम शुरू कर रखी है। इसका उद्देश्य सौंदर्यीकरण के साथ-साथ तालाबों के जरिए राजस्व अर्जित करना भी है। इसी मुहिम के तहत जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने ब्लाॅकों में स्थित तालाबों के सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। पुंथर, भदौना, दरबन, जैतपुर खास, महदेई व अलबेला आदि तालाबों व झीलों का सौंदर्यीकरण शुरू हो गया है।
जिले के तालाबों व झीलों में बड़ी तादाद में सारस पक्षी का प्रवास होता है। डीएम ने फीडबैक लिया तो इसमें और ज्यादा जानकारी सामने आई। डीएम ने इसके बाद यह बात शासन में रखने का निर्णय लिया है। जल्द ही मुख्य सचिव के साथ होने वाली मीटिंग में वे जिले को सारस सिटी के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव रखेंगे। प्रस्ताव को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रशासन ने कार्य योजना भी तैयार कर ली है।
जिला प्रशासन की योजना है कि जून में जब बरसात का दौर शुरू होता है तो सारस का प्रवास बढ़ जाता है। उस समय और भी ज्यादा सारस यहां मौजूद रहते हैं। उसी दौरान कर्मचारियों की टीम लगाकर सारस की गणना कराई जाएगी। इसमें ग्राम स्तरीय अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। (संवाद)
माहौल को बनाएंगे बेहतर
जिला प्रशासन की तैयारी यह है कि सारस की गणना के साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि ऐसी कौन सी वजह है जिससे सारस आसपास के कई अन्य जिलों की तुलना में यहां ज्यादा प्रवास करते हैं। उस माहौल को और मजबूत करने पर जोर होगा। इसमें पशुपालन वैज्ञानिकों से लेकर कृषि विशेषज्ञों की टीम लगाए जाने की तैयारी है। सुझावों के अनुरूप सभी झीलों व तालाबों पर आवश्यक प्रबंध होंगे। स्थानीय लोगों को सारस की देखभाल करने तथा उन्हें बेहतर माहौल प्रदान करने के लिए योजना से जोड़ा जाएगा।