अंबेडकरनगर। निकाय चुनाव में अकबरपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित होने से भाजपा में टिकट देना बड़ी चुनौती बन गया है। अन्य सीटों पर जहां चंद दावेदार सामने हैं वहीं अकबरपुर में अध्यक्ष पद के लिए 16 पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने आवेदन किया है। अन्य दलों में अकबरपुर सीट पर टिकट के लिए ऐसी मारामारी नहीं है जिस तरह भाजपा में आपसी संघर्ष छिड़ा हुआ है।
द्वितीय चरण में अकबरपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। यहां शासन ने पहले अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की थी। इससे सवर्ण दावेदारों में मायूसी छा गई थी। कई माह से ऐसे जो दावेदार गली मोहल्लों का चक्कर लगा रहे थे वे शांत पड़ गए थे। हालांकि पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए गठित आयोग की सिफारिशों के बाद नए सिरे से आरक्षण का जो क्रम निर्धारित हुआ उसमें अकबरपुर की सीट अनारक्षित हो गई। इससे सवर्ण दावेदारों में फिर से उत्साह भर गया। एससी-एसटी वर्ग के भी कुछ उम्मीदवारों को नई उर्जा मिल गई।
सीट सामान्य से अकबरपुर में बीजेपी के टिकट को लेकर मारामारी मची हुई है। यहां अब तक बीजेपी से जुड़ी सरिता गुप्त अध्यक्ष रही हैं। सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने पर भी उनका दावा मजबूत था। अब अनारक्षित होने पर भी वे मैदान में डटी हैं। लेकिन अब कई सशक्त दावेदार भी टिकट के लिए मैदान में कूद गए हैं। इनमें जिला कमेटी के पदाधिकारी, पूर्व जिलाध्यक्ष समेत हिंदू संगठनों के पदाधिकारी व अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं।
अकबरपुर सीट पर 16 दावेदारों ने अपना दावा ठोंका है। ऐसे में पार्टी के लिए टिकट फाइनल करना किसी चुनौती से कम नहीं साबित होगा। जबकि टांडा व जलालपुर नगर पालिका परिषद समेत चार अन्य नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट के लिए चंद दावेदार ही सामने आ सके हैं। पार्टी इससे कैसे निपटती है, यह देखना सर्वाधिक दिलचस्प होगा। (संवाद)
कल तक थे साथ, अब हुए दावेदार
भाजपा में अकबरपुर सीट को लेकर टिकट की जंग खासी दिलचस्प हो चली है। यहां कई ऐसे दावेदार सामने आ रहे हैं जो कल तक दूसरों को टिकट दिला रहे थे। अब सीट सामान्य होते ही खुद दावेदारी जता दिया है। ऐसे भी दावेदार सामने आए हैं जिन्होंने सीट सामान्य होने के बाद खुलकर सामने आए दावेदारों को एक दो दिन तक समर्थन का भरोसा दिलाया लेकिन इसके बाद धीरे से खुद ही चुनाव लड़ने के लिए आवेदन दे डाला। खबर यह भी है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगाने के बाद दो दावेदारों ने आवेदन ही नहीं किया। ऐसे दोनों संभावित दावेदारों को अब अन्य दावेदारों द्वारा अपने-अपने पाले में करने की कोशिशेेंं की जा रही हैं।