अंबेडकरनगर। ठंड के मौसम नेे दस्तक दे दी है। इसके बावजूद परिषदीय व कस्तूरबा विद्यालयों के लगभग 77 हजार छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में डीबीटी योजना के तहत 1200 रुपये की राशि नहीं पहुंच सकी है। बच्चों के अभिभावकों के आधार कार्ड व खाते की गड़बड़ी को दूर न किया जाना इसका कारण बना है।
नए शिक्षा सत्र के सात माह गुजरने के बावजूद लगभग 77 हजार छात्र-छात्राएं नई ड्रेस, स्वेटर, जूता-मोजा व स्टेशनरी के सामान से वंचित हैं। कारण यह कि उनके अभिभावकों के खाते व आधार कार्ड की गड़बड़ियों को अब तक दूर ही नहीं किया जा सका है। अब जबकि ठंड का दौर शुरू हो चुका है तो ऐसे में इन छात्र-छात्राओं को स्वेटर व जूता-मोजा न मिलने से दिक्कत हो रही है।
गौरतलब है कि जिले में कुल 1582 परिषदीय व आठ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं। इनमें कुल दो लाख 24 हजार 103 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं।
पूर्व में एक लाख 17 हजार 787 छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में डीबीटी योजना के तहत 1200 रुपये की राशि भेज दी गई थी। विभिन्न गड़बड़ियों के चलते एक लाख छह हजार 316 अभिभावकों के खाते में रकम नहीं भेजी जा सकी थी। बीते दिनों कई प्रयासों के बाद लगभग 29 हजार अभिभावकों के खाते में रकम पहुंच गई, लेकिन अभी भी 77 हजार छात्र-छात्राओं को डीबीटी योजना का लाभ मिलना बाकी है।
भेजी गई तीन करोड़ की राशि
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार बीते दिनों लगभग 32 हजार अभिभावकों ने गड़बड़ियां दूर करा दी थीं। इनकी सूची बीएसए कार्यालय ने निदेशालय को भेज दी थी। इसके बाद 29 हजार छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में लगभग तीन करोड़ की राशि भेज दी गई। इन अभिभावकों से कहा गया है कि जल्द से जल्द सामग्रियों की खरीद सुनिश्चित कर लें।
शीघ्र पूरी करें खरीदारी
जिन अभिभावकों के खाते में डीबीटी के तहत 1200 रुपये की राशि पहुंच गई है, उन्हें अविलंब खरीदारी करने का निर्देश दिया गया है। अन्य खातों में औपचारिकताओं को पूरा कराकर रकम पहुंचना सुनिश्चित किया जा रहा है।
-भोलेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए