अंबेडकरनगर। कुपोषणमुक्त अभियान पर सुपरवाइजरों की कमी भारी पड़ रही है। एक-एक सुपरवाइजर पर 110-110 आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित 2551 आंगनबाड़ी केंद्रों से योजनाओं के संचालन के लिए सुपरवाइजर के 90 पद सृजित हैं। इनकी तुलना में मात्र 23 पर ही तैनाती है। 67 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2005 से अब तक नहीं तैनाती नहीं हो सकी है।
वर्ष 2005 के बाद एक-एक कर आंगनबाड़ी केंद्रों के बेहतर संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाले सुपरवाइजर सेवानिवृत्त होते रहे लेकिन उनके स्थान पर नई तैनाती नहीं की जा रही। 18 वर्ष के लंबे अंतराल के बीच 67 सुपरवाइजर सेवानिवृत्त हो गए। वैसे तो 2005 से 2010 के बीच सेवानिवृत्त होने वाले सुपरवाइजरों की संख्या कहीं अधिक थी लेकिन 2010 में पदोन्नति कर कुछ पद पर भरपाई की गई।
मालूम हो कि जिले में मौजूदा समय में 2551 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर दो लाख 21 हजार छह वर्ष तक के बच्चे तथा गर्भवती व धात्री पंजीकृत हैं। इन्हें योजनाओं का बेहतर ढंग से लाभ दिलाने, जिले को कुपोषण मुक्त करने समेत अन्य कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिए सुपरवाइजर के 90 पद सृजित हैं। 67 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। मात्र 23 सुपरवाइजर ही मौजूदा समय में तैनात हैं। ऐसे में एक-एक सुपरवाइजर पर 110-110 आंगनबाड़ी केंद्र से संचालित होने वाली योजनाओं की जिम्मेदारी है। (संवाद)
यह हैं सुपरवाइजर की जिम्मेदारी
प्रत्येक आंंगनबाड़ी केंद्र के पर्यवेक्षण करने की बड़ी जिम्मेदारी सुपरवाइजर पर होती है। केंद्र से संचालित होने वाली योजनाओं की निगरानी करना, उनकी रिपोर्ट तैयार कर सीडीपीओ को देने व टीकाकरण अभियान को सफल बनाने का भी जिम्मा सुपरवाइजर पर होता है। जिले को कुपोषणमुक्त करने के लिए चलने वाले अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका सुपरवाइजर पर होती है।
शासन को भेजी गई रिपोर्ट
रिक्त पद पर तैनाती को लेकर शासन को रिपोर्ट समय-समय पर भेजी जाती है। जो सुपरवाइजर हैं उनसे बेहतर ढंग से काम लिया जा रहा है। - दिनेश मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी