अंबेडकरनगर। जिले में सभी राजकीय विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इन विद्यालयों में सबसे अधिक सहायक अध्यापक के 108 और प्रवक्ता के 82 पद रिक्त हैं। इसके चलते विद्यार्थियों की संख्या भी घटती जा रही है। अकेले बोर्ड परीक्षा की बात करें तो एक वर्ष के भीतर पांच हजार से अधिक विद्यार्थियों ने इन विद्यालयों से किनारा कस लिया है।
दरअसल लंबे समय से बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हुए हैं। यही वजह है कि राजकीय विद्यालयों की दशा नहीं सुधर पा रही है। शिक्षकों की कमी के चलते ही अभिभावक भी अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने में अपेक्षाकृत कम रुचि दिखाते हैं। जिले में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 32 राजकीय विद्यालय खोले गए हैं। मानक व सृजित पद के अनुरूप शिक्षकों की कमी के चलते विद्यार्थियों के बेहतर शिक्षा में बाधा उत्पन्न हो रही है।
खासतौर पर इन विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक न के बराबर हैं। लगातार शिक्षकों के सेवानिवृत होने से जिले में रिक्त पदों की संख्या बढ़ गई है। जब इन विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक होते थे, और शिक्षण व्यवस्था दुरुस्त थी तो अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश कराने के लिए लालायित रहते थे। हालांकि वर्तमान में मोटी फीस देकर लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलाना उचित समझते हैं।
राजकीय और माध्यमिक विद्यालयों में देखा जाए तो गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक बहुत ही कम संख्या में रह गए हैं। इन विद्यालयों को शिक्षकों की दरकार है।
पद-सृजित-कार्यरत-रिक्त
प्रधानाचार्य-15-6-9
प्रधानाध्यापक-17-13-4
प्रवक्ता-146-64-82
सहायक अध्यापक-248-140-108
कनिष्ठ सहायक-37-16-21
शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन हो गया है। परीक्षाओं की तिथि जल्द घोषित होने वाली है। इसके बाद रिक्त सभी पदों को भर दिया जाएगा। -गिरीश सिंह, डीआईओएस