मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में बच्चेदानी का ऑपेरशन कराने आई जौनपुर निवासी गुड़िया सिंह (38) की संदिग्ध हालात में मंगलवार को मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
पुलिस, सीएमओ डॉ. आशु पांडेय और संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राजेश सिंह ने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव जौनपुर ले गए।
जौनपुर के गैरवाह थाना के सरपतहा गांव निवासी गुड़िया को 17 सितंबर को पेट दर्द की शिकायत हुई। इस पर परिजन उसे कॉल्विन अस्पताल ले आए।
जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि महिला के बच्चेदानी में ट्यूमर है। 19 नवंबर को डॉ. वीके सिंह ने उसकी सर्जरी की।
इमरजेंसी वार्ड के बेड-16 पर भर्ती महिला मंगलवार दोपहर करीब दो बजे बाथरूम गई। बाथरूम से बाहर नहीं आने पर दरवाजे का लॉक तोड़कर उसे निकाला गया।
गुड़िया के बेटे प्रियांशु का कहना है कि जब उन्हें निकाला गया, तो सांसें चल रही थीं, लेकिन कोई चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी सामने नहीं आया। इस वजह से आनन-फानन मां को निजी अस्पताल ले गए।
जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर कॉल्विन आए और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
हंगामे के बाद परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई और बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर जौनपुर चले गए। वहीं, गुस्से में प्रियांशु ने वार्ड का शीशा तोड़ दिया, जिससे उसके हाथ पर गहरी चोट आ गई।
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अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोप को नकारा
कॉल्विन अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. माया देवी ने लापरवाही के आरोप को नकारते हुए कहा कि महिला आठ दिनों से भर्ती थी। उसे मंगलवार को डिस्चार्ज कर दिया गया था। दोपहर में जब बाथरूम से काफी देर नहीं निकली, तो स्वास्थ्यकर्मियों ने दरवाजे का लॉक तोड़कर उसे निकाला।
सांसें नहीं चलते देख डॉ. आरएन सिंह ने गुड़िया को सीपीआर भी दिया। इसके बाद परिजन मरीज को निजी अस्पताल ले गए, बाद में अस्पताल वापस लाकर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।
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डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप गलत है। 19 सितंबर को महिला का ऑपरेशन हुआ था। उसे मंगलवार सुबह डिस्चार्ज कर दिया गया था। यह घटना अचानक हुई है। डॉ. आरएन सिंह ने महिला को सीपीआर भी दिया था। - डॉ. माया देवी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल