इलाहाबाद हाईकोर्ट में अजीबो-गरीब मामला आया है। मुरादाबाद में एक मकान के कुछ हिस्से को अतिक्रमण बता कर स्वयं तोड़ने के लिए कहा गया। मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो नगर निगम मुरादाबाद और लोक निर्माण विभाग ने जमीन को अपना मानने से ही इन्कार कर दिया। साथ ही बताया कि उनकी ओर से कोई पैमाइश ही नहीं की गई। यह जमीन तो सीलिंग विभाग की है।
इस पर कोर्ट ने अधिकारियों से तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है। न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने यह आदेश याची रामअवतार की याचिका पर दिया है।
याची के अधिवक्ता सुशील कुमार तिवारी ने कोर्ट को बताया कि राम अवतार ने 1984 में गांव में दो दुकान व घर का निर्माण किया था। 1995-96 में याची का गांव नगर निगम के क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। इस समय तक किसी ने अतिक्रमण की शिकायत नहीं की। जुलाई 2024 में अधिकारियों की टीम पहुंची और घरों पर निशान लगाकर अतिक्रमण हटा लेने का आदेश दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
याची वकील ने दलील दी कि नगर निगम की टीम ने पैमाइश करके मकान का एक फीट 15 सेंटीमीटर का हिस्सा स्वयं हटाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने तीनों विभागों के अधिकारियों से तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए पांच हफ्ते बाद पेश करने का आदेश दिया।