खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है। फाफामऊ में गंगा 84.65, छतनाग में 83.68 और नैनी में यमुना 84.39 मीटर पर पहुंच गई हैं। गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 14 सेंटीमीटर, छतनाग में 12 और यमुना 12 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घट रही हैं।
शहर के तटवर्ती इलाकों में तबाही मचाने के बाद गंगा और यमुना का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान से नीचे आ गया है। इससे प्रशासन के साथ ही प्रभावितों ने भी राहत की सांस ली है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में शरण लिए हैं। प्रशासन की ओर से उन्हें भोजन, नाश्ता और पानी की व्यवस्था कराई जा रही है। जलस्तर नीचे जाने के बाद अब बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कालोनियों और मुहल्लों में कीचड़ और सिल्ट जमा हो गया है। जिसकी साफ सफाई में लोग जुट गए हैं। जलस्तर नीचे जाने के बाद भी लोगों के घरों में पानी भरा हुआ है। जिससे वह परेशान हैं।
विज्ञापन
खतरे का निशान 84.734 मीटर पर है। फाफामऊ में गंगा 84.65, छतनाग में 83.68 और नैनी में यमुना 84.39 मीटर पर पहुंच गई हैं। गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 14 सेंटीमीटर, छतनाग में 12 और यमुना 12 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घट रही हैं। 24 घंटे के भीतर बड़े हनुमान मंदिर परिसर से भी गंगा के घटना की संभावना जताई जा रही है।
बाढ़ इलाके में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मच्छरों का प्रकोप तेजी से फैल गया है। इससे कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है, लेकिन इसे नाकाफी माना जा रहा है।