पूर्व सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा से 1.26 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह ने वीओआईपी (वाॅइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल का भी इस्तेमाल किया। उनसे इंटरनेट के जरिये की जाने वाली कॉल के जरिये भी साइबर ठगों ने संपर्क किया। पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई है। फिलहाल उस इंटरनेट डिवाइस का आईपी एड्रेस की जानकारी करने में भी पुलिस जुटी हुई है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूर्व सीएमओ को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ने के बाद जिन नंबरों से संपर्क किया गया, उनमें से कई वीओआईपी नंबर थे। इन नंबरों के बारे में उन्होंने पुलिस को बताया भी है। अपना नाम अनुराग ठाकुर बताने वाले जिस शख्स ने उन्हें सबसे पहले ऑनलाइन ट्रेडिंग के व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा, उसका नंबर भी वीओआईपी नंबर था। 11 डिजिट के इस वीओआईपी नंबर के अलावा इस व्हाट्सएप ग्रुप में कई अन्य वीओआईपी नंबर भी जुड़े हुए थे। यह 11 और 12 अंकों वाले नंबर थे।
उधर, ट्रेड्रिंग पेज लॉक किए जाने के बाद जिन नंबरों से उन्हें कथित लाेन की धनराशि जमा करने का दबाव बनाया गया, वह भी वीओआईपी नंबर ही थे। जानकारों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर लोगों को शिकार बनाने के लिए ऑनलाइन वीओआईपी नंबर खरीदते हैं। कुछ गिरोह ऐसे भी होते हैं जो दूसरे देश में लिए गए सिम से व्हाट्सएप एक्टिवेट कर अकाउंट संचालित करते हैं। फिलहाल पुलिस आईपी एड्रेस ट्रेस करने में जुटी हुई है।
अफसर की पत्नी को भी की थी वीओआईपी कॉल
पूर्व सीएमओ की तरह ही डिजिटल अरेस्ट कर 1.48 करोड़ की ठगी में भी रिटायर आईएफएस की पत्नी को काकोलीदास गुप्ता को भी वीओआईपी कॉल के जरिए ही साइबर ठगी का शिकार बनाया गया था। पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि यह कॉल इंटरनेट के जरिए की गई थी। इस मामले में चार लोगाें को जेल भेजा गया है। हालांकि, कई अहम खुलासे होने अभी बाकी हैं। सरगना देव उर्फ रॉय अभी फरार है। माना जा रहा है कि उसके पकड़े जाने के बाद देश भर में साइबर ठगी की वारदातें करने वाले इस गिरोह से जुड़े कई राज खुलेंगे।