जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कार लोन चुकाने के बाद भी उपभोक्ता का खाता एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) घोषित करने और नोटिस भेजने को सेवा में कमी माना है। उपभोक्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होने और सिबिल स्कोर खराब होने के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे में उपभोक्ता को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम व सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने धूमनगंज के वीरेंद्र सिंह की ओर से दाखिल परिवाद पर दिया।
वीरेंद्र सिंह ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 21 माई 2014 को 3,60,000 रुपये कार लोन लिया था। उन्होंने बैंक की एक शाखा से अपने बचत खाते से हर महीने लोन की किस्त काटने की लिखित सहमति दी थी। नियमित किस्त चुकाने के बाद बैंक ने उनके कार लोन खाते को एनपीए घोषित कर दिया और 23,060 बकाया होने का नोटिस भेज दिया। इस पर उन्होंने वकील के माध्यम से नोटिस भेजा। बैंक ने उसका संज्ञान नहीं लिया तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि बैंक ने खुद ही सूचना के अधिकार के तहत दी गई एक जानकारी में यह स्वीकार किया था कि परिवादी ने पूरा लोन चुका दिया था और खाता बंद कर दिया गया था। इस आधार पर आयोग ने बैंक को सेवा में कमी के लिए दोषी ठहराते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है।