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UP Board Result : जेल की सलाखें न बन सकीं बाधा, बोर्ड परीक्षा में बंदियों ने लहराया परचम

Thu, 23 Apr 2026 06:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वर्ष 2026 की परीक्षा के परिणाम घोषित हो चुके हैं और इस बार भी जेलों में निरुद्ध बंदियों ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। सलाखों के पीछे रहकर पढ़ाई करने वाले कैदियों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा की मशाल जलाए रखी।
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जेल से पास की परीक्षा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वर्ष 2026 की परीक्षा के परिणाम घोषित हो चुके हैं और इस बार भी जेलों में निरुद्ध बंदियों ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। सलाखों के पीछे रहकर पढ़ाई करने वाले कैदियों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा की मशाल जलाए रखी।

हाईस्कूल की परीक्षा में 98.53 फीसदी और इंटरमीडिएट में 84.44 फीसदी बंदी उत्तीर्ण हुए हैं। प्रदेश में कुल 203 बंदी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 181 बंदी उत्तीर्ण हुए हैं। हाईस्कूल की परीक्षा में प्रदेश भर के विभिन्न जनपदों से कुल 68 बंदी शामिल हुए थे, जिनमें से 67 ने सफलता प्राप्त कर 98.53 प्रतिशत का प्रभावशाली परिणाम दिया है।

विशेष बात यह है कि आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, जौनपुर, मुजफ्फरनगर, रामपुर, बरेली, गाजियाबाद समेत 23 जिलों में हाईस्कूल का रिजल्ट शत-प्रतिशत रहा है। केवल वाराणसी एक ऐसा जनपद रहा, जहां उत्तीर्ण प्रतिशत 83.33 प्रतिशत दर्ज किया गया।

वहीं, इंटरमीडिएट की परीक्षा में प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कुल 135 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनमें से 114 बंदियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। इंटरमीडिएट का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 84.44 रहा। इस वर्ग में मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, उन्नाव, कानपुर नगर, फर्रुखाबाद, इटावा, हमीरपुर, जौनपुर, भदोही जनपदों का परिणाम 100 प्रतिशत रहा।

हरदोई में दो बंदियों ने परीक्षा दी और दोनों ही फेल हो गए। इसी तरह प्रयागराज में तीन में से एक ही बंदी पास हुआ। लखीमपुर खीरी जेल में दो बंदियों ने परीक्षा दी और एक ही उत्तीर्ण हो सका। बंदियों की इस सफलता के पीछे जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गईं शैक्षणिक सुविधाएं और नियमित कक्षाओं का बड़ा हाथ माना जा रहा है। जेल में बंद रहते हुए बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करना इन बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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