हाईकोर्ट ने कासगंज में 15 साल पूर्व हुई हत्या के दोषी की आजीवन कारावास की सजा सात साल में बदल दी है। कोर्ट ने कहा कि याची का हत्या करने का कोई इरादा नहीं था, इसलिए आजीवन कारावास की सजा ठीक नहीं है। साथ ही मृतक की पत्नी को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र व न्यायमूर्ति डॉ.गौतम चौधरी की खंडपीठ ने कालीचरण की आपराधिक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि दोषी ने गोली जान से मारने के इरादे से चलाई थी। मृतक की जांघ पर गोली लगी थी। साथ ही याची ने दोबारा गोली नहीं चलाई, जबकि वह चाहता तो चला सकता था। इसलिए अपराध गैर इरादत हत्या का बनता है।