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Prayagraj News: आजाद पार्क में नहीं चलाई जाएगी टॉय ट्रेन, कैंटीन के लिए भी मनाही

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चंद्रशेखर आजाद पार्क में ट्वॉय ट्रेन नहीं चलेगी और न ही झूले लग पाएंगे। इसके अलावा कैंटीन खोले जाने की योजना भी धूमिल हो गई है। इन सभी कार्यों के लिए टेंडर हो चुके हैं लेकिन आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है। इन प्रस्तावों को निरस्त किए जाने की बात कही जा रही है। जल्द ही इस बाबत आदेश जारी कर दिया जाएगा। हालांकि, अफसर इसपर बोलने से बच रहे हैं।
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आजाद पार्क में ट्वॉय ट्रेन के साथ बड़े आकार के झूले लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके साथ ही दो स्थानों पर कैंटीन बनाने का भी प्रस्ताव था। इनके लिए टेंडर हो चुके हैं। बस वर्क ऑर्डर होना बाकी था। इन सेवाओं के लिए शुल्क का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया था, बस स्वीकृति के लिए इसे कमेटी में रखा जाना था।
इसके बाद वर्क ऑर्डर जारी कर इनके काम शुरू होने वाले थे लेकिन सभी योजनाओं को निरस्त किए जाने की बात कही जा रही है। नियमानुसार आजाद पार्क में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकतीं। इसके विपरीत ये इन सभी सुविधाओं के बदले में शुल्क लिया जाना था। इनका संचालन निजी संस्थाओं को करना था। उद्यान प्रशासन ने सिर्फ स्थान दिया था।
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इनसेट
शुक्रवार को पार्क में निर्माण कार्याें का हुआ था निरीक्षण
आजाद पार्क में झील का जीर्णोद्धार कार्य हो रहा है। जॉगिंग ट्रैक का निर्माण भी होना है। बताया जा रहा है कि पार्क संचालन के लिए बनी कमेटी के सदस्यों ने बीते शुक्रवार को पार्क में निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था। इसी के बाद कोई भी व्यावसायिक गतिविधियां नहीं संचालित किए जाने की कही गई। इसी क्रम में ट्वॉय ट्रेन, कैंटीन आदि प्रस्तावों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक अफसर के अनुसार टेंडर पाने वाली संस्थाओं को मौखिक तौर पर मना कर दिया गया है। बस इस बाबत आदेश जारी होना बाकी है। हालांकि, मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के निर्देश पर जिला प्रशासन ने कानूनी सलाह मांगी है। कानूनी सलाह के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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झील में बोटिंग की योजना भी संकट में
- आजाद पार्क में झील का निर्माण कार्य आखिरी चरण में हैं। उसके रंगीन फौव्वारे चालू हो गए हैं। उसमें बोट चलाने की भी योजना है लेकिन अब इस योजना को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। झील में बोटिंग की सुविधा एजेंसी के माध्यम से दिए जाने की तैयारी है। इसका शुल्क भी लिया जाएगा। ऐसे में यह भी व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल होगा। इससे बोट के संचालन पर भी सवाल खड़ा हो गया है।
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