इलाहाबाद हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों ने दिल्ली में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल व प्रमुख सचिव न्याय राज कुमार गोयल से मुलाकात की। मंत्री को ज्ञापन सौंप न्यायमूर्ति के रिक्त पदों को भरने, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, अधिवक्ताओं को नो प्रोफिट-नो लॉस पर आवास उपलब्ध कराने, मेडिकल इंश्योरेंस व अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनाने की मांग की। साथ ही कहा कि अन्य राज्यों के बजाय हाईकोर्ट बार व अवध बार के अधिवक्ताओं का ही न्यायमूर्ति के रूप में चयन हो।
कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति के 160 पद हैं, जिसमें से 77 खाली पड़े हैं। इसकी वजह से लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है। ई-फाइलिंग की समस्या से भी अवगत कराया। इस पर कानून मंत्री ने प्रमुख सचिव न्याय को ज्ञापन के संबंध में उचित कदम उठाने के लिए निर्देशित किया। अंत में कानून मंत्री की पत्नी ने अपने हाथ से बना राजस्थानी भोजन पदाधिकारियों को कराया। वहीं, इस दौरान कानून मंत्री ने बार के पदाधिकारियों को नए संसद भवन में सत्र समापन के दिन भ्रमण कराया। फूलपुर लोकसभा के सांसद प्रवीण सिंह पटेल ने गांधी दर्शन इंटरनेशनल गेस्ट हाउस राजघाट में आकर पदाधिकारियों से मुलाकात की।
इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश खरे, उपाध्यक्ष नीरज त्रिपाठी,नीलम शुक्ला, संयुक्त सचिव प्रशासन सुमित कुमार श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव प्रेस पुनीत कुमार शुक्ला, संयुक्त सचिव महिला आंचल ओझा, कोषाध्यक्ष रणविजय सिंह, सदस्य गवर्निंग काउंसिल उदीसा त्रिपाठी, किरण सिंह, मनीषा सिंह, अभिषेक मिश्रा, अभिषेक तिवारी, सच्चिदानंद यादव, दिनेश यादव, राजेश शुक्ला, सर्वेश्वर लाल श्रीवास्तव, वेद प्रकाश ओझा, बलदेव शुक्ल, बृजेश कुमार सिंह सिंगर आदि रहे।
कानून मंत्री ने अधिवक्ताओं को भेंट की स्वलिखित किताब
कानून मंत्री मेघवाल ने स्वलिखित किताब ‘एक सफर हम सफर के साथ’ और ‘दिव्य पथ दांपत्य का’ पदाधिकारियों को भेंट की। इस दौरान मंत्री ने अधिवक्ताओं को खुश रहने के कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
व्यक्तिगत खर्चे पर गए हैं अधिवक्ता, बार की इसमें कोई भूमिका नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी कानून मंत्री से मिलने नहीं गए। उन्होंने कहा कि मंत्री से मिलने के लिए बार की ओर से कोई भी डेलिगेट दिल्ली नहीं गया है। मंत्री से मिलने अधिवक्ता अपने व्यक्तिगत खर्चे पर गए हैं। इसमें बार की कोई भूमिका नहीं हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को कोई आधिकारिक बुलावा नहीं आया था। इलाहाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कानून मंत्री ने सिर्फ मौखिक रूप से आमंत्रित किया था। इसलिए बार इसमें शामिल नहीं हुआ है।