इलाहाबाद जिला अदालत में एक बाप ने अपने बेटे को किसी और की संतान साबित करने के लिए ढाई दशक तक अदालती लड़ाई लड़ी। पिता ने दावा किया कि बेटा उसका नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ निवासी साले का है। हालांकि, बेटे ने पिता की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट को बताया कि उन्होंने ही पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया और शादी तक की है। अंतत: अदालत ने 80 बरस के बुजुर्ग संगम लाल मिश्र का दावा खारिज करते हुए कहा कि वही उनके पिता हैं। यह बेटा भी अब 63 साल का हो चुका है।
वर्ष 1999 में दाखिल हुए इस दिलचस्प मामले का फैसला सिविल जज मोनिका पाल की अदालत ने सुनाया। करछना तहसील के गांव हथिगनपुरा सुंदरपुर में रहने वाले संगम लाल मिश्र ने अदालत में दावा किया था कि अवधेश कुमार उसकी संपत्ति हथियाने के लिए खुद को उसका बेटा बता रहा है, जबकि वह उसके साले श्याम लाल की संतान है। कहा, उसकी शादी 1966 में प्रतापगढ़ निवासी द्वारिका प्रसाद दुबे की बेटी उर्मिला उर्फ शांति देवी से हुई थी। उनसे सरोज, सरिता, मीरा, मंजू चार पुत्रियां और एक पुत्र राजाराम मोहन है। 1989 में पत्नी की मृत्यु हो चुकी है।