मेजा रोड के पांती स्थित श्री सिद्ध हनुमान मानस मंदिर में मानस सत्संग का श्रवण करने जुटी श्रद्धा
पांती (मेजारोड) के श्री सिद्ध हनुमान मानस मंदिर में मानस सत्संग के छठे दिन डॉ. रामसूरत रामायणी ने कहा कि बुद्धि विवेक छोड़कर भोग का समर्थन करने पर जड़ हो जाती है। उन्होंने अहिल्या के उदाहरण से इस बात को स्पष्ट किया। आस्था दुबे ने श्री रामचरित मानस के अरण्यकांड में वर्णित जयंत प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग अहंकार त्यागने और प्रभु की कृपा समझने का संदेश देता है। डॉ. रामगोपाल तिवारी ने कहा कि परमात्मा को सांसारिक वस्तुएं नहीं, हृदय का पवित्र प्रेम समर्पण ही महत्वपूर्ण है। स्वामी धराचार्य जी महाराज ने सीता के सौंदर्य को अवर्णनीय बताया। विहिप के जिलाध्यक्ष नित्यानन्द उपाध्याय ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।