हत्या का मुकदमा नहीं दर्ज करने पर नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुंडा । संग्रामगढ़ पुलिस की मनमानी कार्यप्रणाली से नाराज कोर्ट ने गुमशुदगी तथा हत्या होने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष की ओर से वैधानिक कार्रवाई न करने पर जांच का आदेश दिया है। तत्काल मुकदमा पंजीकृत कर न्यायालय को एक सप्ताह के भीतर एफआईआर की कॉपी समेत न्यायालय में तत्कालीन थानाध्यक्ष को प्रस्तुत होने के लिए कहा है। न्यायालय ने एसपी को तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका की जांच करके एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
संग्रामगढ़ थाना व स्थानीय गांव का 22 वर्षीय अजीत कुमार यादव बीते 20 सितंबर 2020 को अपने घर से निकला था। परिजनों के खोजबीन के बाद उसका पता न चलने पर पिता रमेश चंद्र यादव ने संग्रामगढ़ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि दो दिन बाद उसका शव प्रयागराज जनपद के होलागढ़ थाना क्षेत्र में नहर से बरामद हुआ था।
सूचना पर पहुंचे परिजनों ने शव की शिनाख्त की। प्रयागराज में पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के पिता ने संग्रामगढ़ थादे में तत्कालीन थानाध्यक्ष को तहरीर देकर बेटे की हत्या का मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया, परंतु थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। जबकि इसी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
संग्रामगढ़ पुलिस को होलागढ़ थाने की पुलिस से जानकारी मिली थी। इसके बावजूद तत्कालीन थानाध्यक्ष संवेदनहीन बने रहे। मृतक के परिजन अपने वकील के माध्यम से तत्कालीन एसपी से मिलकर घटना से अवगत कराते हुए न्याय की मांग की। एसपी के जांच के आदेश देने के बावजूद भी मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
पुलिस से न्याय न मिलने पर कुंडा कोर्ट में 156 (3) में फूलकली की मांग पर 10 फरवरी 2021 न्यायालय से अभियोग पंजीकृत करने के का आदेश हुआ था। फिर भी हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। बीते 11 अप्रैल 2023 को फूल कली की मृत्यु हो गई, तो तत्कालीन संग्रामगढ़ थानाध्यक्ष ने वादिनी के पति रमेशचंद्र यादव को बुलाकर लिखित कागज पर हस्ताक्षर करा लिया कि अब मुकदमे में कोई कार्रवाई नहीं चाहता।
वही कागज पुलिस ने न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। जानकारी होने पर पीड़ित ने न्यायालय में आपत्ति दाखिल की। मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामराज यादव की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने तथा तत्कालीन थानाध्यक्षों की भूमिका संदिग्ध होने पर कोर्ट ने संबंधित थाने के प्रकीर्णवाद बिना अनुचित विलंब प्राथमिकी अनिवार्य रूप से दर्ज कर विवेचना परिणाम से अवगत कराने को कहा है।