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High Court : घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दर्ज मामला 2014 से लंबित है, बहुत ही आश्चर्य की बात

Wed, 04 Jun 2025 07:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। बड़े आश्चर्य के बात है कि इसके तहत भरण-पोषण के लिए दायर वाद 2014 से लंबित है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। बड़े आश्चर्य के बात है कि इसके तहत भरण-पोषण के लिए दायर वाद 2014 से लंबित है। ट्रायल कोर्ट इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। हाईकोर्ट ने इसे बेहद खेदजनक स्थिति बताया। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि कोई कानूनी बाधा न हो तो दो महीने के अंदर इस मामले में फैसला करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने नेहा की याचिका पर दिया। फिरोजाबाद के सिरसागंज थाना क्षेत्र की नेहा ने घरेलू हिंसा अधिनियम की विभिन्न धाराओं में पति के खिलाफ परिवाद दाखिल किया है। एसीजेएम कोर्ट में मामला 2014 से लंबित है। पीड़िता को कोई भरण पोषण नहीं दिया गया। पीड़िता ने मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग करते हुए हाईकोर्ट से गुहार लगाई।

याची अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में लगभग 11 साल से मामला लंबित है। पीड़िता के पक्ष में अभी तक भरण-पोषण के लिए कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया है। ऐसे में पीड़िता आर्थिक कठिनाई और मानसिक पीड़ा से गुजर रही है। ट्रायल कोर्ट मामले में निर्णय लेने में रुचि नहीं ले रहा है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद आश्चर्य व्यक्त करते हुए ट्रायल कोर्ट को कानूनी बाधा न होने पर मामले को दो माह के भीतर निस्तारित करने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।

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