बेटे को व्यवसाय कराने के लिए मकान मालिक की ओर से दुकान खाली कराना गलत नहीं है। यह टिप्पणी कर इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने अलीगढ़ के हरिशंकर की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी।
उत्तर प्रदेश शहरी भवन अधिनियम के तहत मकान मालिक के पक्ष में दुकान खाली करने के प्राधिकारी के आदेश को अलीगढ़ के हरिशंकर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची के वकील ने जीएसटी दस्तावेज प्रस्तुत कर दलील दी कि बेटा स्वतंत्र व्यवसाय कर रहा है। वह अपने पिता के अधीन बिल्कुल भी व्यवसाय नहीं कर रहा। ऐसे में बेटे को स्वतंत्र व्यवसाय कराने के लिए दुकान खाली कराना उसकी वास्तविक जरूरत नहीं है।
वहीं प्रतिवादी मकान मालिक के वकील ने दलील दी कि जीएसटी नंबर वर्ष-2018 में रद्द कर दिया गया। जबकि दुकान खाली करने के लिए आवेदन वर्ष 2020 में दायर किया गया। इसके बाद व्यवसाय केवल पिता के नाम पर पंजीकृत था। अब बेटे के अलग व्यवसाय के लिए दुकान खाली कराना वास्तविक जरूरत है। दोनों पक्षाें को सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि यदि बेटा अपने पिता के साथ व्यवसाय में था तो उसे स्वतंत्र रूप से कार्य का पूरा अधिकार है और ऐसी आवश्यकता सद्भावनापूर्ण है।