Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारत या किसी घटना का जिक्र किए बिना पाकिस्तान का समर्थन करना प्रथमदृष्टया देशद्रोह का अपराध नहीं बनता है। भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य करने पर ही देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने पाकिस्तान के समर्थन में पोस्ट करने वाले आरोपी को सशर्त जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने संभल के रियाज की जमानत अर्जी पर दिया।
संभल के बहजोई थाने में रियाज पर देशद्रोह की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने इंस्टाग्राम पर "चाहे जो हो जाए सपोर्ट तो बस.....पाकिस्तान का करेंगे” पोस्ट किया था। मामले में आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि इस पोस्ट से देश की गरिमा या संप्रभुता को कोई ठेस नहीं पहुंची है। आरोप पत्र पहले ही दाखिल हो चुका है। ऐसे में जमानत दिया जाना चाहिए। राज्य के अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से आवेदक की ओर से की गई ऐसी पोस्ट अलगाववाद को बढ़ावा देती है।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे संविधान के मूलभूत आदर्श हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट के मामले में देशद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। कोर्ट ने आरोपी की आयु, आपराधिक इतिहास न होने और आरोप पत्र दाखिल होने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
कोर्ट की टिप्पणी
सोशल मीडिया पर बोले गए शब्द या पोस्ट भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में देशद्रोह के तहत तभी कार्यवाही करें, जब किसी पोस्ट से देश की संप्रभुता और अखंडता प्रभावित होती हो या अलगाववाद को बढ़ावा मिलता हो। - हाईकोर्ट