इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के बलपूर्वक बेदखली मामले में सपा नेता आजम खां और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के अंतिम फैसले पर लगी रोक 16 सितंबर तक बढ़ा दी है। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे पर प्रतिक्रिया देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने दिया।
याचिकाओं में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर अहमद फारूकी की दोबारा गवाही और दोषमुक्त करने वाली वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में लाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह वीडियोग्राफी उनकी घटनास्थल पर अनुपस्थिति साबित कर सकती है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी है चुनौती
2016 के जबरन बेदखली मामले में आजम खां सहित अन्य पर 2019 में रामपुर के कोतवाली थाने में डकैती, जबरन घर में घुसना, आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में मुकदमा दर्ज है। सभी के मुकदमों को आठ अगस्त 2024 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए), रामपुर की ओर से एकल वाद में समाहित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने गवाहों को दोबारा बुलाने और महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य शामिल करने की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की जिसे 30 मई 2025 खारिज कर दिया गया था। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।