खेल महाकुंभ के शिविर में क्रीड़ा भारती की ओर से आयोजित संवाद में बोलते हुए पद्मा श्री दीपा मलिक।
- फोटो : अमर उजाला।
हर दिव्यांग खिलाड़ी को दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी मजबूती बनाना है। मेरा संघर्ष पांच साल की उम्र से शुरू हुआ था। 55 साल की उम्र तक जारी है। मैंने हमेशा धैर्य रखा और मेरे पास नेशनल, एशियन और ओलंपिक के कई मेडल हैं। अब पैरालंपिक खिलाड़ियों की मेडल गिनती 300 फीसदी बढ़ी गई है। ये बातें सोमवार को पद्मश्री दीपा मलिक ने क्रीड़ा भारती और टीवाईसी की ओर से आयोजित ‘खेल महाकुंभ’ में कहीं।
दीपा मलिक भारतीय पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष रही हैं। एशियाई पैरालंपिक समिति ने दक्षिण एशिया के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है। वहीं, डॉ. भीम सिंह संधू ने युवा खिलाड़ियों को चोट से कैसे बचें और अगर चोटिल हो जाएं तो रिकवरी कैसे होगी की जानकारी दी। दूसरे सत्र में समाजसेवी प्रमोद राघव ने खिलाड़ियों को ट्रैक सूट सहित अन्य सामानों का वितरण किया। इस मौके पर क्रीड़ा भारती यूपी के अध्यक्ष अवनीश सिंह और उपाध्यक्ष अंगद सिंह मौजूद रहे।
खो-खो में खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन
खेल महाकुंभ में यूपी, एमपी, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों से आई खो-खो की 38 टीमों के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। मंगलवार को खो-खो का फाइनल और आर्चरी प्रतियोगिता होगी।
पानीपत से साइकिल चलाकर पहुंचे नेशनल एथलीट दीपक शर्मा
पानीपत के सोंधापुर गांव के रहने वाले दीपक शर्मा खेलों को बढ़ावा देने के लिए 800 किमी साइकिल चलाकर आठ दिन में खेल महाकुंभ पहुंचे। दीपक राष्ट्रीय स्तर के एथलेटिक्स खिलाड़ी हैं। उन्होंने कई मेडल अपने नाम किए हैं। अब इनका कहना है कि ओलंपिक 2036 भारत में हो तो देश की झोली मेडल से भर जाए।