इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव और न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी का सिविल लाइंस स्थित होटल में शुक्रवार को स्वागत किया गया। ब्रिटिश संसद को संबोधित कर लौटे न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने कहा, ब्रिटिश संसद में संबोधन से पहले अंग्रेजी में बात रखने का अनुरोध किया गया।
इस बात से ठेस लगी, लेकिन तय किया कि ब्रिटिश भूमि पर बोलूंगा तो हिंदी में ही। संबोधन का क्षण बेहद यादगार है, क्योंकि अंग्रेजों की धरती में हमने उन्हें यह भी याद दिलाया कि हम कल भी विकसित थे आज भी हैं।
उन्हें बताया कि सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत को गैरों ने खूब लूटा। हाउस ऑफ लॉर्ड्स से उनका परिचय जज के रूप में कराया गया तो उन्हें रोका और कहा, हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में गंगा बहती है।
वहीं, हिंदी में 21 हजार निर्णय देने के लिए सम्मानित न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने कहा कि भाषा संवाद का माध्यम है योग्यता का मापदंड नहीं, इसलिए हमें हिंदी को अपनी कार्य संस्कृति का हिस्सा बनने में संकोच नहीं करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता जेएस कश्यप ने किया। संचालन बाल कृष्ण यादव और संयोजन अधिवक्ता राय साहब यादव ने किया। इस अवसर पर अधिवक्ता शिवनाथ सिंह, अखिलेश सिंह, सरोज कुमार यादव, कपिल यादव, संजय यादव, धर्मेंद्र सिंह, सत्येंद्र आजाद समेत सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।