इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सास की मां(नानी सास) की हत्या में दामाद को मिली फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी। कहा कि फांसी की सजा केवल विरल से विरलतम मामलों में ही दी जा सकती है। यह महज लूट के लिए की गई हत्या का मामला है। यह फैसला न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान व न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने मेरठ निवासी दामाद तरुण गोयल की ओर से फांसी की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर दिया है।
मामला फिरोजाबाद के उत्तर थाना क्षेत्र का है। मेरठ के सेनेटरी कारोबारी तरुण गोयल की शादी फिरोजाबाद के लोहिया नगर में हुई थी। ऑनलाइन सट्टा खेलने के कारण उस पर 50-60 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। लॉकडाउन में वह मेरठ से भाग कर फिरोजाबाद आ गया। वहां लोहिया नगर में घरजमाई बनकर ससुराल में रहने लगा था। यहीं से वह सेनेटरी का काम करता था।
ससुराल वाले उस की आर्थिक रूप से भी मदद करते थे। लोहिया नगर के करीबी मोहल्ले आर्यनगर में सास रंजना उर्फ पिंकी का मायका था। रंजना के भाई लोकेश बड़े कोयला कारोबारी हैं। दामाद हाेने के नाते अक्सर तरुण का उनके घर आना-जाना था। लेकिन, उसकी नजर नानी सास कमला के जेवरात और रुपयों पर खराब हो गई। उसे मालूम हुआ कि एक अप्रैल को लोकेश के परिजन सिनेमा देखने जाएंगे और नानी सास घर पर अकेली रहेंगी। वह करीब दो बजे उनके घर पहुंच गया। घर पर नौकरानी रेनू शर्मा भी थी।
रेनू को चाय बनाने किचन में भेजकर वह सीधे नानी सास के कमरे में घुस गया। गहने और रुपये लूटने के लिए पहले उसने नानी सास की पेचकस से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। इसी बीच कमरे में रेनू पहुंची तो उसे भी मरणासन्न कर मौके से भाग निकला। सिनेमा देखकर घर पहुंचे परिजनों ने नौकरानी को अस्पताल भेजा और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस विवेचना के दौरान नौकरानी के बयान से घटना का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने तरुण के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। एक साल तक चले ट्रायल के दौरान अभियोजन ने सात गवाहों को पेश किया। इसमें चश्मदीद रेनू की गवाही सबसे अहम रही। फिरोजाबाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) की अदालत ने 25 अप्रैल 2023 को तरुण गोयल को फांसी की सजा सुना दी थी। इसके खिलाफ तरुण ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।