जिला अदालत ने जाली नोट बनाने के छह मुल्जिमों को बरी कर दिया। वहीं, बयान से मुकरने वाले मुद्दई के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार मिश्र द्वितीय की अदालत ने 19 साल पुराने आपराधिक मामले को निस्तारित करते हुए सुनाया।
मामला बारा थाना क्षेत्र का है। 14 फरवरी 2005 को सीधीटीकर गांव के इंद्रजीत आदिवासी ने घुरमी गांव के महमूद, छक्कन उर्फ मजीद अली, सामान उर्फ अज्जन अली, अशरफ, दरोगा उर्फ शकील और बबलू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था की आरोपियों ने नोट दोगुना करने का झांसा दे कर उससे सौ-सौ रुपये के दस नोट मांगे थे। इसके बाद उस रुपये से जाली नोट छापने की सामग्री खरीद कर ले आए है।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया था। इसके बाद अदालत में दाखिल आरोप पत्र पर 19 साल चले ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से वादी मुकदमा समेत चार गवाही कराई गई। सभी गवाह आपने बयान से मुकर गए। मुकदमा दर्ज कराने वाले इंद्रजीत ने कहा कि उसने एफआईआर नहीं लिखाई। पुलिस ने उसे थाने बुलाकर कागज पर अंगूठा लगवाया था।
गवाहों के पक्षद्रोही होने के चलते अभियोजन अपनी कहानी को सिद्ध नहीं कर सका। लिहाजा, कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही झूठा मुकदमा लिखा कर बयान से मुकरने वाले इंद्रजीत के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दे दिया।