एनओसी के फेर में अटका है मामला
यह भी बताया जा रहा है कि आईसीएआर में आवेदन लंबित होने की वजह यह है कि पिछले छह वर्षों से यूजीसी ने शुआटस को एनओसी नहीं दिया है। दरअसल किसी भी डीम्ड यूनिवर्सिटी को राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित होने के लिए यूजीसी से एनओसी लेना अनिवार्य होता है।
मार्च 2022 के बाद की डिग्री को लेकर भी सवाल
आईसीएआर मान्यता समाप्त होने के बाद अब मार्च 2022 के बाद संस्थान से मिलने वाली डिग्री को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह डिग्रियां आईसीएआर से मान्यता प्राप्त विवि की मानी जाएंगी। शुआट्स के पूर्व शिक्षक डॉ. सुब्रत कुमार सिंह का दावा है कि विद्यार्थियों ने जब भी एडमिशन लिया हो, लेकिन उनकी डिग्री अगर मार्च 2022 के बाद की है तो यह एक्रेडिएटेड संस्थान की डिग्री नहीं मानी जाएगी। उनका यह भी दावा है कि उक्त जानकारी की उन्होंने आईसीएआर के साथ ही जेएनकेवीवी जबलपुर व ग्वालियर विश्वविद्यालय से पुष्टि की है।