नियुक्ति के बाद अवार्ड हुई पीएचडी
जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. देवराज वडगू को पीएचडी की अर्हता न पाए जाने पर भी सेलेक्शन ग्रेड दिए जाने की संस्तुति की गई थी। दरअसल शासनादेश के मुताबिक, एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी अनिवार्य अर्हता थी। हालांकि डॉ. देवराज को इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीटयूट की ओर से 23 अप्रैल 2007 को पीएचडी अवार्ड की गई थी। यह भी बात सामने आई है कि दस्तावेजों में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत दिखाई गई थी। लेकिन दस्तावेजों की जांच से यह आशंका है कि संबंधित पद पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया का पालन किया गया।
18.95 लाख का अधिक भुगतान
सूत्रों के मुताबिक, जांच में पाया गया है कि अर्हता तिथि के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर पद का वेतनमान व अन्य परिणामी लाभ दिए जाने के चलते डॉ. वडगू को 18.95 लाख रुपये का अधिक भुगतान हुआ। यह भुगतान एक सितंबर 2011 से 31 मार्च 2018 तक की अवधि में किया गया।