हाईकोर्ट से कांग्रेस नेता अजय राय को झटका लगा है। कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने और मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मुकदमे को रद्द करने का कोई वैधानिक आधार नहीं है। अजय राय और चार अन्य की दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की कोर्ट ने यह आदेश दिया।
मामले में अजय राय, संतोष राय, चंद्रभूषण दुबे और विजय कुमार पांडे सहित अन्य लोगों के खिलाफ वर्ष 2010 में वाराणसी के चेतगंज थाने में बलवा, मारपीट आदि की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। बाद में इसमें गैंगस्टर एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया। यह मामला स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण वाराणसी की अदालत में लंबित है । अजय राय व अन्य की तरफ से याचिका दायर कर मुकदमे की कार्यवाही समाप्त करने की मांग की गई। कहा गया कि उनका शिकायतकर्ता से समझौता हो गया है। तथा समझौते के आधार पर दर्ज मुकदमे को रद्द किया जाए।
याचिका का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव ने कहा कि इसी प्रकरण में अभियुक्तों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी मुकदमा दर्ज है। इसे समझौते के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। साथ ही कहा कि अजय राय का आपराधिक इतिहास है और उनपर 27 मुकदमे दर्ज हैं। मुकदमे का ट्रायल पूरा होने वाला है। ऐसे में मुकदमे को रद्द करने का कोई आधार नहीं है ।
कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याची के विरुद्ध गैंगस्टर के तहत वादी मुकदमा ने मामला दर्ज नहीं कराया है। यह कार्रवाई सरकार की ओर से की गई है और सरकार तथा याची के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मामले में चार्जशीट को पहले ही चुनौती दी गई थी और वह याचिका खारिज हो चुकी है। इसलिए मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।