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Prayagraj: सद्दाम को जालसाजी के दो मुकदमों में भी मिली क्लीन चिट, धूमनगंज पुलिस को नहीं मिले सबूत

Tue, 03 Oct 2023 11:03 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

सार

थाने में सुनवाई न होने पर पीड़ितों की गुहार पर कोर्ट ने आदेश दिया था, तब जाकर यह मुकदमे लिखे गए थे। हालांकि, धूमनगंज पुलिस साक्ष्य नहीं ढूंढ सकी और दोनों ही मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।
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माफिया अशरफ का साला सद्दाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अतीक अहमद व अशरफ के इशारे पर उनके गैंग को चलाने वाले अब्दुल समद उर्फ सद्दाम को धूमनगंज पुलिस ने दो अन्य मुकदमों में भी क्लीन चिट दे दी है। अशरफ के साले सद्दाम पर यह दोनों मामले धोखाधड़ी, जालसाजी कर जमीन कब्जाने, गाली-गलौज व धमकी से संबंधित थे। थाने में सुनवाई न होने पर पीड़ितों की गुहार पर कोर्ट ने आदेश दिया था, तब जाकर यह मुकदमे लिखे गए थे। हालांकि, धूमनगंज पुलिस साक्ष्य नहीं ढूंढ़ सकी और दोनों ही मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।

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इनमें से पहला मुकदमा दिसंबर 2015 को लिखाया गया था। मूलरूप से फतेहपुर और उस समय हरवारा में रहने वाले राजेश विश्वकर्मा ने सद्दाम समेत दो लोगों पर केस दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि उसने हरवारा में एक जमीन खरीदी। इसे सद्दाम ने विक्रेता संग मिलकर गुंडई व धोखाधड़ी करते हुए अपने नाम करा लिया। थाने में शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई तब उसने कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया। 18 महीने तक विवेचना चलने के बाद विवेचक राकेश कुमार ने इसमें अंतिम रिपोर्ट लगा दी। 

महिला ने सद्दाम समेत छह पर लिखाया था केस
सद्दाम पर धूमनगंज थाने में ही अक्तूबर 2016 में एक और केस दर्ज हुआ। कोर्ट के आदेश से यह केस हरवारा निवासी संतरा देवी ने लिखाया था। उसका आरोप था कि उसके पति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था और इसका फायदा उठाकर सद्दाम व उसके गुर्गों ने उसकी जमीन बिना रुपये दिए अपने नाम करा ली। इस मुकदमे की विवेचना करीब 5.5 साल तक चली। इसके बावजूद विवेचकों को सद्दाम के खिलाफ सबूत नहीं मिला। पिछले साल जून में मौजूद इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौर्य ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। 
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एक थाने में चार मुकदमे, तीन में एफआर
इस तरह से धूमनगंज थाने में अशरफ के साले सद्दाम के खिलाफ 2015 से 2021 तक कुल चार मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से तीन में साक्ष्य न मिलने का हवाला देकर विवेचकों ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इनमें से दो मुकदमे कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए तो एक मुकदमा खुद थाने के दरोगा ने लिखाया। तीन-तीन मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में बात करने की कोशिश पर अफसरों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
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