कैंसर पीड़ित सचिन प्रजापति को कीमोथेरेपी के बाद 30 जुलाई तक के लिए हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल से बताया गया कि मरीज को घर से अस्पताल लाने की सुविधा तो है लेकिन घर पहुंचाने की नहीं। इसके बाद मजबूर पिता राम धनी को ई-रिक्शा बुलाना पड़ा।
जिस कैंसर पीड़ित बच्चे सचिन को मंडलायुक्त ने दो दिन पहले ही अपनी कुर्सी पर बैठाया। सारे कर्मचारी जिसे देखकर भावुक हो गए थे। उसके माता-पिता को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया गया था। बुधवार को सारे दावे हवा-हवाई साबित हुए। इसे सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता कहें या लापरवाही, 10 वर्षीय सचिन को जब एसआरएन अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया तो उसे एंबुलेंस नहीं मिली। मजबूरन उसे ई-रिक्शे से घर जाना पड़ा।
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कैंसर पीड़ित सचिन प्रजापति को कीमोथेरेपी के बाद 30 जुलाई तक के लिए हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल से बताया गया कि मरीज को घर से अस्पताल लाने की सुविधा तो है लेकिन घर पहुंचाने की नहीं। इसके बाद मजबूर पिता राम धनी को ई-रिक्शा बुलाना पड़ा। दो दिन पहले मंडलायुक्त ने इलाज संबंधी सभी सुविधाएं मुहैया कराने का भरोसा दिलाया था।
सीएमओ को निर्देशित किया था कि इनके परिवार का आयुष्मान कार्ड तत्काल बनाया जाए। वहीं, जानकारी मिलने पर मंडलायुक्त ने सीएमओ डॉ.आशु पांडेय को कड़ी फटकार लगाई। कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए। मासूम सचिन को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जब भी कहीं जाना-आना हो उसे एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए। ऐसा न होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।