फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj News: सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता समेत दो से 44.21 लाख रुपये की ठगी

विज्ञापन
विज्ञापन
साइबर जालसाजों ने विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता समेत दो लोगों से 44.21 लाख रुपये ठग लिए। साइबर पुलिस ने दोनों ही मामलों में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।
विज्ञापन

सरोजनी नायडू मार्ग, सिविल लाइंस निवासी अरुण कुमार पाठक (64) विद्युत विभाग से मुख्य अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हैं। इनका सिविल लाइंस स्थित पंजाब नेशनल बैंक में खाता है।
शिकायत में उन्होंने साइबर थाना पुलिस को बताया कि पांच अक्तूबर को नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के माध्यम से 6,800 रुपये ट्रांजक्शन का मोबाइल पर एसएमएस आया।
विज्ञापन

बैंक जाने पर पता चला कि खाते से 31,66,800 रुपये कट गए हैं। दो अक्तूबर को पांच-पांच लाख के दो ट्रांजक्शन, तीन अक्तूबर को दो बार नौ लाख, चार अक्तूबर को 1.74 लाख पर रुपये कटे थे।
वहीं, दूसरे खाते से तीन अक्तूबर को दो बार में एक लाख और चार अक्तूबर को 2.30 लाख रुपये का ट्रांजक्शन हुआ था। इसकी जानकारी होने पर पीड़ित बुजुर्ग ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
साइबर पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आशंका है कि जालसाज ने पीड़ित को धोखे में लेकर एप डाउनलोड करवाया और मोबाइल फोन का रिमोट कंट्रोल लेकर खाते से रुपये ट्रांसफर कर लिए, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए जांच चल रही है।

एफडी पर ले लिया 6.36 लाख का लोन
अरुण कुमार पाठक ने साइबर पुलिस को बताया कि बैंक से पता चला कि पांच अक्तूबर को जालसाज ने उनकी एफडी पर 6.36 लाख रुपये का लोन भी ले लिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बिना खाताधारक की अनुमति के जालसाज ने लोन कैसे पास करवा लिया। वहीं, साइबर पुलिस के अफसरों ने बताया कि लोन के बारे में बैंक कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी।

0000
ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 12.55 लाख निकाले
वहीं, ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर पुराना बैरहाना निवासी अजितेश कुमार से साइबर जालसाज ने 12.55 लाख रुपये ऐंठ लिए।
शिकायत में पीड़ित ने बताया कि शेयर ट्रेडिंग एप बीआरडीटी से निवेश करने पर फायदा दिलाने का झांसा दिया गया। इस पर अलग-अलग रकम निवेश कर दी।
अब पैसे ट्रांजक्शन करने पर 25 फीसदी सर्विस फीस जमा करने को कहा जाने लगा। जालसाज ने कहा, सर्विस फीस जमा करने पर ही पैसा ट्रांजक्शन होगा।
-


लिंक क्लिक करते ही होता है एप डाउनलोड : विशेषज्ञ
यूपी पुलिस के साइबर एक्सपर्ट राहुल मिश्रा बताते हैं कि अक्सर जालसाज कम समय में अधिक पैसा कमाने या फिर निवेश करने का झांसा देकर मोबाइल पर लिंक भेजते हैं। झांसे में आकर लोग लिंक को क्लिक कर देते हैं। जिससे पीड़ित के मोबाइल पर एनी डेस्क समेत कई तरह के एप इंस्टाल हो जाते हैं और इसी का फायदा उठाकर जालसाज मोबाइल को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं।
विज्ञापन



ऐसे बचें साइबर ठगी से

- किसी के द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें।
- समय-समय पर मोबाइल को फार्मेट करते रहें।
- मोबाइल को चेक करते रहे कि कोई एप तो डाउनलोड नहीं।
- लिंक हमेशा लालच देने वाला होता है।
- बिना समझे किसी भी एप को डाउनलोड न करें।
- अगर ठगी का शिकार हुए हैं तो फौरन साइबर पुलिस को सूचना दें।

-

ठगी का शिकार होने पर यहां दें सूचना
साइबर हेल्पलाइन नंबर : 1930
वेबसाइट : cybercrime.gov.in
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें