संगम की रेती पर मंगलवार को होने वाली प्रथम गो-संसद की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं। बारिश के बीच शिविर में देश भर से पहुंचे प्रतिनिधियों ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य से मुलाकात की। गो-संसद में हिस्सा लेने वाले संतों के ठहरने के इंतजाम किए गए। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य ने कहा कि मंगलवार का दिन गो माता के सवाल पर निर्णायक होगा। गाय को राष्ट्रमाता घोषित कराने के सवाल पर देश व्यापी आंदोलन का एलान होगा।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर ने गाय की महत्ता बताई। उन्होंने पुराणों का हवाला देते हुए बताया कि सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा ने सबसे पहले गो माता का सृजन किया था, ताकि उनकी सृष्टि का पोषण हो सके। पालन के अपने इसी गुण से गाय विश्व माता कही गई। विश्व में सबका पालन-पोषण करने वाली गो माता को दुर्भाग्य से मौजूदा समय क्षति पहुंचाई जा रही है। यह कृत्य भारतीय संस्कृति पर कलंक के टीका के समान है। अब समय आ गया है, जब समस्त सनातन समाज को जागृत करना होगा।
जागरूकता के इस महायज्ञ में हर हिंदू की ओर से आहुति होनी ही चाहिए। ऐसे में जो जहां है वही से गो-माता की करुण पुकार को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने में अपना योगदान करे। गो-व्यथा को दूर कर उन्हें अभयदान दिलाने का सबसे सशक्त मार्ग यही है कि उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय नस्ल की ऐसी सभी गाय जिनका संकरीकरण नहीं किया गया है उन्हें राष्ट्रमाता का आसन दिलाना है। सभा के बीच गो- पालकों के सुझावों और सवालों पर उन्होंने उत्तर भी दिया। उन्होंने बताया कि इस गो संसद में चारों पीठों के शंकराचार्यों का प्रतिनिधित्व होगा।