इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पैरागॉन कंपनी के मालिक अतीक के रिश्तेदार कमर अहमद काजमी को धोखाधड़ी के मामले में राहत देते हुए उसकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। हालांकि, कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं और 25 लाख रुपये भी जमा करने को कहा है।
साथ ही उसे निजी मुचकले और दो प्रतिभूतियों पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने कमर अहमद काजमी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याची पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर माल की आवाजाही किए बिना पांच वर्षों में फर्जी तरीके से तकरीबन चार करोड़, 28 लाख रुपये से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर लिया।
माल की आपूर्ति करने वाली फर्में भी मौजूद नहीं है। उनकी फर्म से वर्ष 2018-19 से मई 2024 तक 17 करोड़, 33 लाख, 83 हजार 966 रुपये का ई-वे बिल भी बिना किसी ठोस आधार के रद्द कर दिया गया है। याची के खिलाफ मेरठ के सिविल लाइंस थाने में एसटीएफ की ओर से धोखाधड़ी सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि आवेदक निर्दोष है और उसे वर्तमान मामले में झूठा फंसाया गया है। आवेदक एक पंजीकृत फर्म का मालिक है, जिसे जीएसटी अधिनियम के तहत विधिवत पंजीकृत किया गया है। यह पंजीकरण अभी भी वैध है और इसे अब तक रद्द नहीं किया गया है।
सभी खरीदारी पंजीकृत पार्टियों जैसे मेसर्स संतोष इंटरप्राइजेज, संदीप मेटल, हनी मेटल और राजपाल एंड संस से जीएसटी से उनकी साख की जांच के बाद की गई है। उपरोक्त सभी फर्में जीएसटी के तहत विधिवत पंजीकृत पाई गईं।
प्राथमिकी भी जीएसटी अधिकारियों की ओर से नहीं बल्कि एसटीएफ की ओर से दर्ज कराई गई। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया, लेकिन कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत अर्जी मंजूर कर ली।