प्रयागराज। हेमवती नंदन बहुगुणा के सानिध्य में राजनीतिक ककहरा सीखने वाले एक जमाने के कद्दावर नेता राकेश धर त्रिपाठी से जुड़ी भ्रष्टाचार की कड़ियां उनके राजनीतिक करियर को ले डूबीं। एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज और इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बनने के बाद उनका राजनीतिक सितारा चमका तो फिर वह आगे बढ़ते ही गए। बाद में भ्रष्टाचार के दाग लगने के बाद वह अर्श से फर्श पर आ गए।
पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी ने कई दलों का दामन थामा। 1985 से 1989 में जनता पार्टी, 1989 से 1991 तक जनता दल, 1996 से 2002 तक भाजपा और वर्ष 2007 से 2012 तक बसपा के टिकट पर हंडिया विधान सभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व मंत्री का नाम फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कॉलेजों को मान्यता दिलाने के मामले में भी आया था। लोकायुक्त जांच में भी इन पर आरोप सिद्ध पाए गए थे।
भ्रष्टाचार से रिश्ते क्या जुड़े, फिर इनकी राजनीतिक दलों से दूरियां भी बढ़ती गईं। कई दल इनसे नाता जोड़ने से बचते दिखे। फिर भी, प्रयागराज की राजनीति में बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में इनकी हनक में कमी नहीं आई। सीधे दरवाजे से भाजपा ने इनसे दूरी बनाई, तो इन्होंने पीछे के दरवाजे से भाजपा के सहयोगी अपना दल एस के टिकट से 2022 का चुनाव प्रतापपुर विधान सभा से लड़े लेकिन सपा की विजमा यादव से इन्हे करारी हार का सामना करना पड़ा। बरहाल, अब इतने लंबे राजनीतिक जीवन में छवि पर लगते दाग पर अदालत की मुहर लग गई। जिसके बाद अदालत में मौजूद पूर्व मंत्री की आंखें फैसला सुनने के बाद डबडबा गईं और गला रुंध गया।