इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक लाख, 67 हजार, 838 रुपये के साइबर फ्राड के आरोपी बुधिसार शिकारी को जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अन्य सह अभियुक्तों को मिली जमानत की पैरिटी नहीं दी जा सकती। क्योंकि याची पर किंगपिन अपराधी होने का आरोप है। इस कारण इतना बड़ा फ्राड किया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।
मामले में घनश्याम ने साइबर थाना प्रयागराज में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि उन्होंने एयरटेल मोबाइल फोन रिचार्ज कराया। उनके खाते से 598 रुपये कट गया किंतु फोन रिचार्ज नहीं हुआ। बैंक प्रबंधक एयरटेल को जानकारी दी। इसके बाद एक राहुल का फोन आया, कहा एयरटेल से हैं। एटीएम पिन, खाता नंबर, आईएफएससी कोड, जन्मतिथि ली। पैसा खाते में आ गया। इसके बाद खाते से पैसे कटने लगे और कुल एक लाख, 67 हजार, 838 रुपये खाते से कट गए। इसकी एफआईआर दर्ज कराई गई।
याची का कहना था वह निर्दोष है और सह अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी है इसलिए उसे भी जमानत पर रिहा किया जाए। सरकार की तरफ से कहा गया चार्जशीट दाखिल की गई है। कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। अपराध गंभीर है। जमानत अर्जी निरस्त की जाय। कोर्ट ने कहा आजकल साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। वे झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़प रहे हैं। ऐसे अपराध के आरोपितों को जमानत पाने का हक नहीं है।