राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष लोकसभा।
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कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय को लेकर दिए गए कथित बयान का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित किया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी के मुताबिक, राहुल गांधी ने सितंबर 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने कहा था कि भारत में सिखों को कड़ा पहनने, पगड़ी बांधने और गुरुद्वारे जाने की आजादी को लेकर स्थिति चिंताजनक है। इसी बयान को आधार बनाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्रा, जो पूर्व ग्राम प्रधान और समाजसेवी हैं, ने कथित बयान के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी। उनके अधिवक्ता के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत आवेदन दिए जाने के बावजूद निचली अदालत से राहत नहीं मिली। इसके बाद मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई।
याचिकाकर्ता के पक्ष ने दलील दी कि कथित बयान की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच और कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए। अधिवक्ता ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 का भी उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि बयान के अगले दिन खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने राहुल गांधी की टिप्पणियों का समर्थन किया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित कर लिया। अब मामले में अदालत के अंतिम आदेश पर निगाहें टिकी हैं।