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गुप्त नवरात्रि की पूर्णाहुति, विदा हुई जगदंबा

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प्रयागराज। मानव कल्याण के लिए दुर्गासहस्त्रनाम, महामारी निवारण के लिए शतचंडी पाठ व अन्य अनुष्ठानों के साथ मंगलवार को गुप्त नवरात्रि की साधना की पूर्णाहुति हो गई। इसके साथ ही शहर के अन्य शक्तिपीठों, देवी मंदिरों और घरों में चल रहे अनुष्ठान भी पूरो हो गए। कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए भी विशेष जप पूरा किया गया। मीरापुर स्थित मां कल्याणी देवी धाम में फूलों से सजे मंदिर परिसर में वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी। इस दौरान थर्मल स्क्रीनिंग के बाद मंदिर में भक्तों को प्रवेश दिया गया। दूरी बनाकर मां के जयकारे लगाए जा रहे थे। वर्ष भर में लगने वाले चार नवरात्रों में आषाढ़ शुक्ल प्रतिप्रदा से आरंभ देवी आराधना का इस बार का गुप्त नवरात्रि षष्ठी तिथि के क्षय की वजह से आठ दिन का ही था। मंगलवार की सुबह कल्याणी देवी मंदिर में -या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता/नमस्तस्यै मनस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ... के मंत्रों के साथ सविधि पूर्णाहुति आरंभ हुई। इसके बाद मां की रंग-बिरंगे फूलों और आभूषणों से भव्य दरबार सजाया गया। कोरोना से मुक्ति के लिए मंदिर परिसर में आचार्य श्याम जी पाठक के आचार्यत्व में दुर्गा सप्तशती पाठ के अलावा सात वैदिक आचार्यों की ओर से चल रहे सवा लाख बीजमंत्र का जाप को भी पूर्ण किया गया। पं अखिलेश शुक्ल, पं लवकुश, राजेंद्र शुक्ल, महेश चंद्र दुबे, पं पुरुषोत्तम पांडेय दो जुलाई तक गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठानों को कराया। इसी तरह मीरापुर स्थित शक्तिपीठ मां ललिता देवी के धाम में भी गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठानों की पूर्णाहुति की गई। ललिता देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा के अनुसार कोरोना से मुक्ति के लिए गुप्त नवरात्रि में आठ दिन तक जप, तप और ध्यान के अलावा शतचंडी पाठ कराया। इसी तरह मां अलोप शंकरी के दरबार में भी गुप्त नवरात्रि पर साधकों ने राष्ट्र और समाज की खुशहाली के लिए अनुष्ठानों की पूर्णाहुति की। 
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