फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj News: गाइड बेचने के लिए प्रकाशकों ने रोकी थी किताबों की सप्लाई

विज्ञापन
विज्ञापन
गाइड बेचकर मुनाफा कमाने के चक्कर में प्रकाशकों ने एनसीईआरटी की किताबों की सप्लाई रोकी थी। यूपी बोर्ड की सख्ती के बाद हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की किताबें बाजार में आ गईं। विद्यार्थी इन्हें आसानी से ले सकते हैं। कई विद्यालयों में अधिकतर बच्चों के पास किताबें भी उपलब्ध हो गई हैं। अधिकारियों का दावा है कि अब किताबों की किल्लत नहीं है।
विज्ञापन

यूपी बोर्ड ने 2018 से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम अपना लिया था। बाजार में एनसीईआरटी कि किताबों की किल्लत रहती है। इसलिए उसी पाठ्यक्रम पर आधारित किताबें प्रदेश के कुछ प्रकाशकों से छपवाई जाती हैं। इस बार किताबें छपवाने का टेंडर नहीं हो सका है।
पूर्व में एनसीईआरटी की किताबों के प्रकाशन का टेंडर राजीव प्रकाशन, जनरल आफसेट और पीतांबरा प्रकाशन को मिला था। इन प्रकाशकों ने किताबें प्रकाशित करके बेचीं लेकिन एनसीईआरटी को रायल्टी का भुगतान नहीं किया। प्रकाशकों का कहना था कि कोरोना काल में किताबें कम बिकने से उनका नुकसान हुआ है। इसलिए वह रायल्टी नहीं दे पाए हैं।
विज्ञापन

रायल्टी का भुगतान न होने पर एनसीईआरटी ने आगे के प्रकाशन की अनुमति नहीं दी। ऐसे में बाजार में किताबें उपलब्ध न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इसी बीच शिक्षा निदेशक के निर्देश पर प्रकाशकों का गोदाम चेक किया गया तो किताबें उपलब्ध मिलीं। कई प्रकाशकों ने बाजार में गाइड बेचने के लिए किताबों की सप्लाई रोक दी थी। उनको किताबों कम और गाइड में ज्यादा फायदा था।
अफसरों की सख्ती के बाद प्रकाशकों ने गोदाम से किताबों की सप्लाई शुरू कर दी। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि सभी जिलों में किताबों की उपलब्धता 80 प्रतिशत से अधिक है। बाजार में यूपी बोर्ड की किताबें आ गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें