इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के आरोप में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कहा कि सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम दंगों के दौरान होने वाली तोड़फोड़ से हुए नुकसान पर लागू होता है, जबकि गांव सभा की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अदालत ने भदोही निवासी ब्रह्मदत्त यादव की याचिका पर दिया है। मामला औराई थाना क्षेत्र का है। याची के खिलाफ गांव सभा की जमीन पर अतिक्रमण करने के आरोप में 16 दिसंबर 2022 को एफआईआर दर्ज हुई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने 28 दिसंबर 2022 को सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याची के वकील ने दलील दी कि सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के प्रावधानों का उपयोग ग्राम सभा की भूमि को हुए नुकसान के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसे मामले में राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची के खिलाफ शुरु हुई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।