इलाहाबाद हाइकोर्ट ने जेलों में बंद ऐसे लोगों को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है जिनको 15 मार्च या उसके बाद जमानत मिल चुकी है, मगर लॉक डाउन के कारण जमानतें जमा न कर पाने के कारण जेलों से रिहा नहीं हो पाए हैं।
हाइकोर्ट ने प्रदेश भर के जेल अधिकारियो को निर्देश दिया है वह ऐसे बंदियों से अपनी संतुष्टि के मुताबिक निजी मुचलका लेकर उनको रिहा कर दें। कोर्ट ने यह शर्त भी रखी है कि व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा होने वाले इन बंदियों को रिहाई के एक माह के भीतर जमानतें जमा करनी होगी। स्वयोजित जनहित याचिका पर अपने आवास से सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने दिया है।
पीठ ने आर्बिटेशन के मामलो में जिनमे अवधि पूरी हो रही थी 25 मई तक अवधि बढ़ा दी है। कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्रदेश भर में तमाम ऐसे लोग है जिनकी जमानतें 15 मार्च या उसके बाद मंजूर हुई है। इसके बाद लॉक डाउन लागू हो जाने के कारण ये लोग जमानतें नहीं दे पाए इसलिए अभी भी जेलो में बंद है। इस समस्या का निदान करते हुए हाइकोर्ट ने यह समादेश जारी किया है।इससे पूर्व भी हाइकोर्ट ने आम वादकारियो को राहत देते हुए अंतरिम आदेशो को अगले एक माह के लिए बढ़ा दिया था तथा मुकदमो के दाखिले की मियाद भी एक माह के लिए बढ़ाई जा चुकी है।