लंबे समय से घाटे में चल रहे पराग के प्लांट को 10 साल के लिए लीज पर दिए जाने की तैयारी है। मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसका रास्ता साफ हो गया। शासन के निर्देश के क्रम में आगे की प्रक्रिया होगी।
प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के तहत मंदर मोड़ के पास पराग का 60 हजार किग्रा क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया गया है। शुरुआती दिनों में तो प्लांट में क्षमता से कहीं ज्यादा दूध आता था, लेकिन अब मात्र साढ़े छह हजार किग्रा दूध आ रहा है। हालांकि, 389 समितियां अब भी जुड़ी हैं, लेकिन दूध की मात्रा क्षमता के 10 फीसदी ही रह गई है। लगातार घाटे की वजह से कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है तो पशुपालकों का भी करीब दो करोड़ रुपये बकाया है। प्लांट में कर्मचारियों की संख्या भी घटकर 25 रह गई है।
महाप्रबंधक समेत दो कर्मचारी ही फेडरेशन के हैं। इस स्थिति को देखते हुए प्लांट को निजी संस्थाओं को लीज पर दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में प्लांट को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने का निर्णय लिया गया। ऐसे में इसे 10 साल के लिए लीज पर दिए जाने की कवायद तेज हो गई है। महाप्रबंधक जितेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि प्लांट संचालन को लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव रखा गया था। शासन के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।