Prayagraj Flood : तेजी से बढ़ रहा है गंगा और यमुना का जलस्तर।
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संगम नगरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा और यमुना के जलस्तर ने लोगों को वर्ष 1978 एवं 2013 में आई बाढ़ याद दिला दी है। शहर के निचले एवं नदियों के आसपास वाले गांवों की स्थिति कुछ ज्यादा ही विकट है। कछारी क्षेत्र में बने ज्यादातर मकानों का एक तल पानी में डूब गया है। हजारों प्रभावित लोगों ने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां पनाह ले ली है। अपने ही शहर में सैकड़ों बाढ़ प्रभावित लोग रिफ्यूजी बन शिविरों में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं।
प्रयागराज में आई बाढ़ ने शहर के छोटा बघाड़ा, सलोरी, जोंधवल, अशोक नगर, राजापुर, बेली, मेंहदौरी, गोविंदपुर, गंगानगर , म्योराबाद, गौसनगर और करेलाबाग आदि इलाकों में हजारों लोगों को नुकसान पहुंचाया है। गंगा-यमुना के लगातार बढ़ने से भयभीत लोग अपने जरूरी सामान समेट सुरक्षित ठिकानों की ओर चल दिए हैं।
छोटा बघाड़ा क्षेत्र के काफी अंदर तक बाढ़ का पानी घुस गया। इसी तरह ककरहा घाट और बरगद घाट में भी यमुना का पानी काफी ऊपर तक चढ़ गया। ससुर खदेरी नदी में लोग अपने घरों से जरूरी सामान भी नहीं समेट सके।
एनी बेसेंट शिविर में रह रहे अमित गुप्ता ने बताया कि इस बार मौसम विभाग ने जो अलर्ट जारी किया है उसमें बताया गया है अगस्त और सितंबर दोनों ही माह बारिश होगी। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। इसी तरह महबूब अली और शिविर में रह रही साधना ने बताया कि उसके दो छोटे बच्चे हैं। घर में काफी सामान छोड़कर अचानक आना पड़ा। एनी बेसेंट शिविर में आए आत्माराम ने बताया कि वर्ष 2013 की बाढ़ में उनका काफी नुकसान हुआ था। कमोबेश, वही स्थिति एक बार फिर से हो गई है। शिविर में हम रिफ्यूजी की तरह रह रहे हैं।