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जमातियों के साथ इविवि प्रोफ़ेसर पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी

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अमर उजाला ब्यूरो प्रयागराज। दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल होकर लौटने के बाद शहर में रहते मिले १६ विदेशी जमातियों के साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर पर भी पुलिस बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। माना जा रहा है कि क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद जैसे ही विदेशी जमातियों पर कारवाई की जाएगी, उसी के साथ प्रोफ़ेसर पर भी शिकंजा कसा जाएगा। बता दे कि प्रोफ़ेसर पर इंडोनेशियाई जमातियों को शाहगंज स्थित मुसाफिर खाने में ठहराने का आरोप है। गौरतलब है कि इविवि के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ शाहिद पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली में आयोजित जलसे में शामिल होकर लौटे इंडोनेशिया के सात नागरिकों को चोरी-छिपे शहर में शरण दिलाई। यही नहीं वह खुद भी तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल हुए और वापस लौट कर आने के बाद इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं दी। बता दें कि इस मामले में उनके खिलाफ शिवकुटी थाने में धारा 144 के उल्लंघन और बीमारी फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। उधर शाहगंज थाने में इंडोनेशियाई नागरिकों पर दर्ज मुकदमे में भी उन्हें आरोपी बनाए जाने की बात पुलिस कह चुकी है। दरअसल पुलिस का कहना है कि इंडोनेशियाई नागरिकों ने जमात से लौटकर चोरी छुपे मुसाफिर खाने में शरण ली ऐसे में वह धारा 144 के उल्लंघन और बीमारी फैलाने के मामले में आरोपी बने। इसके साथ ही वीजा नियमों का उल्लंघन करने का भी आरोप उन पर लगा। जमातियों के शहर में आने की जानकारी पुलिस प्रशासन को ना देना और उन्हें यहां ठहराने में मदद करने की वजह से प्रोफेसर भी इस मामले में बराबर के दोषी बनते हैं। नाम ना छापने की शर्त पर एक अफसर ने बताया कि फिलहाल विवेचना चल रही है और इंडोनेशियाई नागरिक 14 दिन की होम क्वॉरेंटाइन अवधि में रखे गए हैं। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों पर अगर विदेशी जमातियो की गिरफ्तारी की जाती है तो प्रोफ़ेसर पर भी गिरफ्तारी की कार्रवाई संभव है। दरअसल बहराइच में इसी तरह चोरी छुपे रहते मिले इंडोनेशियाई जमातियो को क्वॉरेंटाइन अवधि के बाद पुलिस जेल भेज चुकी है
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