महाकुंभ- 2025 के लिए चकर्ड प्लेटों और पांटून पुल की मरम्मत का टेंडर अब तक नहीं हो सका है। दो बार टेंडर निकालने के बाद शिकायत हुई तो उसे रद्द करते हुए कई बदलाव किए गए। पहले 13 भाग में निकाले गए टेंडर को छह में समेट दिया गया। इससे प्रत्येक टेंडर की धनराशि बढ़ गई है। अब बड़े ठेकेदार ही इसे ले पाएंगे। साथ ही इसे प्रहरी पोर्टल से बाहर कर दिया गया है। इसलिए निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग के मेला खंड के अधिशासी अभियंता ने बीती 20 जून को चकर्ड प्लेट और पांटून पुल की मरम्मत के 13 टेंडर जारी किए थे। 3.40 करोड़ का टेंडर एक अगस्त को खुलना था। लेकिन आवेदन कम आने के कारण तिथि एक सप्ताह बढ़ाई गई। छह अगस्त को टेक्निकल बिड खुलनी थी तो उससे पहले शिकायत हो गई। इसमें टेंडर भरने वाले कई ठेकेदारों के पास उस कार्य का अनुभव नहीं था। विभाग को शिकायतों का निस्तारण कर टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करनी थी। इसी दाैरान विभाग ने टेंडर रद्द कर दिया। फिर 13 कार्यों को छह में समेट दिया। इससे दो टेंडर 83 लाख, दो 34 लाख, एक 57 लाख और दूसरा 27 लाख रुपये का हो गया। टेंडर की धनराशि में बदलाव करके उसे 17 सितंबर को जारी किया गया। इसे 23 सितंबर को खोला जाएगा। साथ ही टेंडर को प्रहरी पोर्टल से हटा दिया गया। इसके आवेदन तो ऑनलाइन लिए जाएंगे लेकिन दस्तावेजों की जांच मैनुअल होगी। इससे टेंडर देने में पक्षपात होने की संभावना है।
- टेंडर ऑनलाइन जारी किया गया है। पूर्व में जारी टेंडर में शिकायतें हो गईं थी। कार्य को जल्द से जल्द करवाना है, इसलिए कुछ बदलाव किया गया है। सोमवार को यह टेंडर खुलेगा। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। - देवेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता
क्या करता है प्रहरी पोर्टल
पीडब्ल्यूडी के सभी टेंडरों के आवेदनों की जांच प्रहरी पोर्टल करता है। प्रहरी पोर्टल सॉफ्टवेयर है और वह ऑनलाइन जांच करके मानक के अनुसार आए हुए आवेदन छांटकर विभाग को साैंप देता है और टेंडर उसी को मिलता है जो सभी मानकों को पूरा करता है। जो टेंडर प्रहरी में नहीं भेजे जाते हैं, उनकी जांच विभागीय स्तर पर होती है तो अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर दे देते हैं। चकर्ड प्लेट और पांटून पुल मरम्मत का टेंडर प्रहरी पोर्टल को नहीं भेजा गया है, इसलिए शिकायत होने लगी है।