इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए दाखिल याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की कोर्ट ने फैसला सुनाया। एकलव्य एजुकेशनल फाउंडेशन व अन्य की ओर से याचिका दायर की गई थी। दो अक्तूबर 17 को भारत में ओबीसी के बीच आरक्षण लाभों का न्यायसंगत वितरण के लिए ओबीसी समूहों के उप वर्गीकरण के लिए जस्टिस जी रोहिणी की अध्यक्षता में रोहिणी आयोग का गठन किया गया था। याची ने 2003 में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए याचिका दायर कर परमादेश की मांग की थी।
प्रतिवादी के वकील ने कहा कि रिपोर्ट भारत के संविधान के अनुच्छेद 340(2) के तहत राष्ट्रपति को सौंपी गई है। इसके बाद संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना है। प्रक्रिया पूरी होने तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती। न्यायालय ने कहा कि रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को लेकर जो भी प्रक्रिया चल रही है वह संविधान के अनुरूप है। इसलिए इसमें कोई मामला नहीं बनता है। याचिका खारिज कर दी।