प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) आनापुर का संचालन फार्मासिस्ट के भरोसे हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में एक महिला और एक डॉक्टर नियुक्त हैं, जो शायद ही कभी आते हैं। भवन जर्जर है। जबकि सीएचसी कौड़िहार के अधीक्षक का कहना है कि डॉक्टर नियमित जाते हैंं।
पीएचसी के रजिस्टर में आठ स्टाफ के नाम दर्ज हैं। डॉ. रविंद्र पांडेय, डॉ. पूनम शुक्ला, फार्मासिस्ट एके गुप्ता और मधुकर। चार अन्य कर्मी हैं। क्षेत्र के आशीष श्रीवास्तव, बंशी लाल हरिजन आदि ने बताया कि ज्यादातर फार्मासिस्ट एके गुप्ता और मधुकर ही ओपीडी संभालते हैं। अन्य सुविधाओं के नाम पर भी कुछ नहीं है।
क्षेत्र के लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से मिल कर समस्या से अवगत कराया था। लगभग दो साल हो गए लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। उमेश, धमेंद्र पटेल, संतोष कुमार आदि ने पूर्व की भांति सुविधा उपलब्ध करने की मांग की है।
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पीएचसी की समस्या को लेकर उच्च अधिकारी और जन प्रतिनिधियों से मिलकर समस्या से बताई गई। लेकिन अभी कुछ भी नहीं हुआ।
- बलराम सिंह एडवोकेट
दस सालों में अस्पताल की समस्या चौपट हो गई। पहले दूर-दराज के गांव से महिला-पुरुष आते और चौबीस घंटे इलाज होता था।
- मनोज सिंह प्रधानाचार्य बरना कॉलेज।
पीएचसी भवन पूरी तरह से खराब हो गया है। बाउंड्री वॉल टूटी है, बारिश में छत टपकती है। शौचालय न पीने के पानी की व्यवस्था।
- आशीष श्रीवास्तव एडवोकेट।
पीएचसी भवन स्टाफ के बैठने लायक नहीं। मामले में पत्राचार किया गया है। लेकिन दोनों डाक्टर सीएचसी कौड़िहार आते हैं और पीएचसी आनापुर भी जाते हैं।
- डॉ. अनुराग तिवारी, अधीक्षक सीएचसी कौड़िहार